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Gopalganj Mega Bridge: जादोपुर-मंगलपुर महासेतु में तकनीकी खराबी से बढ़ी चिंता, भारी वाहनों पर लगी रोक

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गोपालगंज और पश्चिम चंपारण को जोड़ने वाले जादोपुर-मंगलपुर महासेतु में स्पैन गैप और पाया धंसने की खबर के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई है और विशेषज्ञ टीम जांच करेगी।

गोपालगंज/आलम की खबर:गोपालगंज और पश्चिम चंपारण के बीच आवागमन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले जादोपुर-मंगलपुर महासेतु में तकनीकी खराबी की खबर सामने आने के बाद पूरे इलाके में चिंता का माहौल बन गया है। पुल के एक हिस्से में स्पैन गैप दिखाई देने और पाया संख्या-5 के धंसने की सूचना के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। स्थानीय लोगों के बीच किसी बड़े हादसे की आशंका को लेकर दहशत फैल गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत और तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।

करीब 549 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस महासेतु को उत्तर बिहार के सबसे महत्वपूर्ण पुलों में गिना जाता है। लगभग 16.5 किलोमीटर लंबे इस पुल का उद्घाटन 17 मार्च 2016 को मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने किया था। पुल बनने के बाद गोपालगंज और बेतिया के बीच की दूरी करीब 100 किलोमीटर तक कम हो गई थी। यही वजह है कि यह पुल लाखों लोगों के लिए लाइफलाइन की तरह काम करता है। रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन इस मार्ग से होकर गुजरते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से पुल के एक हिस्से में असामान्य कंपन और हल्का झटका महसूस हो रहा था। इसके बाद कुछ लोगों ने पुल के स्पैन में गैप जैसी स्थिति देखी, जिसकी सूचना प्रशासन को दी गई। मामला सामने आते ही जिला प्रशासन और संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने के तुरंत बाद अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और प्रभावित हिस्से का निरीक्षण शुरू किया गया।

मौके पर गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा, एसडीएम अनिल कुमार, जल संसाधन विभाग और पुल निर्माण निगम के कई अधिकारी पहुंचे। अधिकारियों ने पुल के प्रभावित हिस्से का बारीकी से निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। प्रशासन ने स्थिति को गंभीर मानते हुए तत्काल तकनीकी जांच कराने का फैसला लिया है।

जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि पुल के स्पैन में गैप और पाया धंसने की सूचना मिलने के बाद मामले को प्राथमिकता के आधार पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि तकनीकी रिपोर्ट विशेषज्ञ संस्थानों को भेज दी गई है और जल्द ही विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर विस्तृत जांच करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की मरम्मत और सुरक्षा संबंधी कदम उठाए जाएंगे।

एहतियात के तौर पर प्रशासन ने फिलहाल भारी और बड़े वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी है। अधिकारियों का कहना है कि पुल पर दबाव कम करने के लिए यह फैसला लिया गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। हालांकि छोटे और हल्के वाहनों की आवाजाही अभी जारी है। पुलिस और प्रशासन की टीम पुल के दोनों ओर तैनात की गई है ताकि यातायात को नियंत्रित किया जा सके।

प्रशासन ने आम लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि पुल से गुजरते समय निर्धारित गति सीमा का पालन करें और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। वहीं भारी वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

इस महासेतु में तकनीकी खराबी की खबर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी लागत से बने पुल में कुछ ही वर्षों में इस तरह की समस्या सामने आना गंभीर मामला है। कई लोगों ने पुल निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि तकनीकी खराबी की असली वजह क्या है।

व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। यह पुल उत्तर बिहार के कई जिलों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगने से माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खासतौर पर गोपालगंज, बेतिया और आसपास के क्षेत्रों में रोजमर्रा की आवाजाही करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पुलों में समय-समय पर तकनीकी जांच और रखरखाव बेहद जरूरी होता है। यदि किसी हिस्से में गैप या पाया धंसने जैसी समस्या दिखाई दे तो तुरंत कार्रवाई करना आवश्यक होता है। इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती स्तर पर मरम्मत कर लेने से बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

राज्य सरकार भी इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। संभावना जताई जा रही है कि विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट आने के बाद पुल के प्रभावित हिस्से में मरम्मत कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा।

फिलहाल जादोपुर-मंगलपुर महासेतु को लेकर पूरे इलाके में चिंता का माहौल बना हुआ है। लोग चाहते हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करे और पुल को पूरी तरह सुरक्षित बनाकर आवाजाही सामान्य की जाए। अब सभी की नजर विशेषज्ञ टीम की जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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